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होली खेल रहयो नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में,

  होली खेल रहयो नंदलाल मथुरा की कुंज गलीन में , मथुरा की कुंज गलिन में गोकुल की कुंज गलीन में , होली खेल रहे नंदलाल ....   या रंग भरी पिचकारी माहरे सारा ऊपर मारी , ओजी सारोने कर दियो लाल मथुरा की कुंज गलिन में ,   या रंग भरी पिचकारी माहरे मुखड़ा ऊपर मारी , ओजी मुखड़ा ने कर दियो लाल मथुरा की कुंज गलिन में ,   या रंग भरी पिचकारी माहरे अंगिया ऊपर मारी , ओजी अंगिया ने कर दियो लाल मथुरा की कुंज गलिन में ,   या रंग भरी पिचकारी माहरे पगलिया ऊपर मारी , ओजी पगलिया ने कर दियो लाल मथुरा की कुंज गलिन में ,   यहां चन्द्रसखी निजगावे चरना मैं सीष नवावे , ओजी महारो बेड़ो लगा दयो पार मथुरा की कुंज गलिन में ,

एक दिन वो भोले भंडारी

एक दिन वो भोले भंडारी , बन कर के ब्रिज नारी गोकुल में आ गये है पारवती भी मना के हारी, ना माने त्रिपुरारी , गोकुल में आ गये है   पारवती से बोले मैं भी चलूँगा तेरे संग में , राधा संग श्याम नाचे मैं भी नाचूँगा तेरे संग में , रास रचेगा ब्रिज में भारी, हमें दिखो प्यारी , गोकुल में आ गये है ......   ओ मेरे भोले स्वामी कैसे ले जाओ तोहे साथ में , मोहन के सिवा वहा, कोई पुरुष ना जाये रास में , हँसी करे गी ब्रिज की नारी , मान लो बात हमारी , गोकुल में आ गये है ......   ऐसा बनादो मुझे को , कोई न जाने इस राज को , मैं हु सहेली तेरी ऐसा बताना ब्रिज राज को , बना के जुड़ा पहन के साड़ी चाल चले मत वाली , गोकुल में आ गये है .......   देखा मोहन ने जब तो समझ गए ओ सारी बात रे ऐसी बजायी बंसी सूद बूद भूले भोलेनाथ रे सर से खिसक गयी जब साड़ी मुस्काए गिरधारी भोले शर्मा गए है   दीनदयाल तेरा तब से , गोपेश्वर ...