कोई कहे गोविंदा , कोई गोपाला। मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥ --- राधाने श्याम कहा , मीरा ने गिरधर। कृष्णा ने कृष्ण कहा , कुब्जा ने नटवर॥ ग्वालो ने तुझको पुकारा गोपाला। मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥ --- घनश्याम कहते हैं बलराम भैया। यशोदा पुकारे कृष्ण कन्हैया॥ सुरा की आँखों कें तुम हो उजाला। मैं तो कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥ --- भीष्म ने बनवारी , अर्जुन ने मोहन। छलिया भी कह कर के बोला दुर्योधन॥ कन्स तो जलकर के कहता है काला। मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥ --- भक्तों के भगवान , संतो के केशव। भोले कन्हैया तुम मेरे माधव॥ ग्वालिनिया तुझको पुकारे नंदलाला। मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥ -- कोई कहे गोविंदा , कोई गोपाला। मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
कानूड़ा छोड़ रे, छोड़ रे कानूड़ा रे रंग मत तू ना डाल कानूड़ा रे आँख्या में पडगी गुलाल ।।स्थाई।। कानूड़ा छोड़ रे, छोड़ रे कानूड़ा रे रंग मत तू ना डाल कानूड़ा रे आँख्या में पडगी गुलाल ।।स्थाई।। कर सोला सिणगार आयी थानै साम्हों ठाडो पायी नजरा था सै खूब बचाई देख लिया रे मूनै ग्वाल ...।।1।। मानी मानी होली आई थानै घणी मस्ती छाई एकली छू में लुगाई कर दिया म्हारा बेहाल...।।2।। बरसाणा में खेलण आज्यो ग्वाल्या ने भी संग में ल्याज्यो देखूली कैया बचजाज्यो ऐसों दिखाऊली कमाल...।।3।। म्हारा संग में सखियाँ सारी मारेली थांके पिचकारी छोडूली नहीं गिरधारी रंग भीनी दूयूली थारा गाल...।।4।। होली का थे छो खिलाड़ी म्हाने समझया खूब अनाड़ी ऐसी पड़ूली पिछाड़ी ओ रे 'रूप' का रसाल ....।।5।। कर सोला सिणगार आयी थानै साम्हों ठाडो पायी नजरा था सै खूब बचाई देख लिया रे मूनै ग्वाल ...।।1।। मानी मानी होली आई थानै घणी मस्ती छाई एकली छू में लुगाई कर दिया म्हारा बेहाल...।।2।। बरसाणा में खेलण आज्यो ग्वाल्या ने भी संग में ल्याज्यो देखूली कैया बचजाज्य ऐसों दिखाऊली कमाल...।।3।। म्हारा संग में सखियाँ सारी मारेली था...
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