तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी

 तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी,

सभी कह रही ब्रज की गोरी मुरारी॥

 

आनंदकंद, अरे ब्रज के चंदा,
दरस को तरसती चकोरी तुम्हारी॥

तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी,

सभी कह रही ब्रज की गोरी मुरारी॥

 

छबीले लाला, छैल नटराज हो तुम,
बनी है किशोरी से जोड़ी तुम्हारी॥

तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी,

सभी कह रही ब्रज की गोरी मुरारी॥

 

चपल चतुराई में हो सिरमौर सबके,
सबसे निराली है लीला तुम्हारी॥

तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी,
सभी कह रही ब्रज की गोरी मुरारी॥

 

नचाओगे वैसे ही नाचेंगे गिरिवर,
तुम्हारे ही हाथों में डोरी हमारी॥

तुम ही ने करी मन की चोरी हमारी,
सभी कह रही ब्रज की गोरी मुरारी॥

 

बोलो वृंदावन बिहारी लाल की जय!


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